Author: Jeevan Nidhi

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हुंकार | कविता

निरुत्साहित होता हूँ वही उत्साह देता है, जब गिरता हूँ वही उठने का जोश देता है, मैं एक पागल हूँ...

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प्रेम | कविता

प्रेम अभिलाषा है, या फिर जिज्ञासा है, कुछ पाने की,या फिर कुछ देने की आशा है, प्रेम ईश्वर है, या...

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जग्गू और कुक्कू | कहानी

जग्गू…तुम्हारा मालिक तुमको बहुत प्यार करता है, फिर भी तुम उसकी रखवाली नहीं करते। मेरा मालिक तो मुझे मारता भी...

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नई उड़ान | कविता

चलो बटोरें अवशेषों को, फिर एक नई उड़ान भरें, आज झुका दे अम्बर को भी, अब ऐसी हुंकार भरें, पाँव...